#सुख_दुःख_का_विचार
(१) चंद्रमा शुभ ग्रहो से युक्त या दृष्ट हो तो मन प्रसन्न रहता है| चंद्रमा अशुभ ग्रहो से युत या दृष्ट हो तो मन दुःखी रहता है| चंद्रमा मन है जिस प्रकार के ग्रहो से युक्त या दृष्ट हो तो वैसी ही मन की अवस्था होती है|
(२) यदि दिन का जन्म हो और चंद्रमा अपने या मित्र नवांश मे होकर गुरू से दृष्ट हो तो जातक सुखी रहता है|
(३) यदि रात्रि का जन्म हो और चंद्रमा अपने मित्र नवांश मे होकर शुक्र से दृष्ट हो तो जातक सुखी रहता है|
(४) यदि लग्नेश और जन्मेश बली हो तो सुखी और निर्बल हो तो दुःखी|
(५) यदि लग्नेश और जन्मेश मित्र हों तो सुखी तथा शत्रु हो तो दुःखी होता है|
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