वर्गोत्तम ग्रह-
जब कोई लग्न/ग्रह लग्न कुंडली के अतिरिक्त अन्य वर्ग कुंडलियों मे भी एक ही राशि मे हो तो उसे वर्गोत्तम लग्न/ग्रह कहते हैं चर राशि मे पहला नवांश,स्थिर राशि मे दूसरा तथा द्विस्वभाव राशि मे तीसरा नवांश वर्गोत्तम होता हैं |
जब कोई ग्रह अथवा लग्न दो वर्गो मे वर्गोत्तम होता हैं उसे पारिजातांश कहते हैं इसी प्रकार 3 वर्गो मे उत्तमांश,4 वर्गो मे गोपुरांश,5 वर्गो मे सिंहासनांश,6 वर्गो मे पर्वतांश,7 वर्गो मे देवलोकांश,8 वर्गो मे ब्रह्मलोकांश,9 वर्गो मे एरावतांश,तथा 10 वर्गो मे गया ग्रह श्रीधामांश कहलाता हैं | यह दस वर्ग लग्न,होरा,डी3,डी7,डी9,डी10,डी12,डी16,डी20,व डी60 होते हैं |
मेष राशि के अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण (0-3’20) का ग्रह वर्गोत्तम होता हैं |
वृष राशि के रोहिणी नक्षत्र के दूसरे चरण (13’20-16’40) का ग्रह वर्गोत्तम होता हैं |
मिथुन राशि के पुनर्वसु नक्षत्र के तीसरे चरण (26’40-30’00) का ग्रह वर्गोत्तम होता हैं |
कर्क राशि के पुनर्वसु नक्षत्र के प्रथम चरण (00-3’20) का ग्रह वर्गोत्तम होता हैं |
सिंह राशि के पूर्वफाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण (13’20-16’40) का ग्रह वर्गोत्तम होता हैं |
कन्या राशि के चित्रा नक्षत्र के दूसरे चरण (26’40-30’00) का ग्रह वर्गोत्तम होता हैं |
तुला राशि के चित्रा नक्षत्र के तीसरे चरण (00-3’20) का ग्रह वर्गोत्तम होता हैं |
वृश्चिक राशि के अनुराधा नक्षत्र के चतुर्थ चरण (13’20-16’40) का ग्रह वर्गोत्तम होता हैं |
धनु राशि के उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण (26’40-30’00) का ग्रह वर्गोत्तम होता हैं |
मकर राशि के उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के दूसरे चरण (00-3’20) का ग्रह वर्गोत्तम होता हैं |
कुम्भ राशि के शतभीषा नक्षत्र के तीसरे चरण (13’20-16’40) का ग्रह वर्गोत्तम होता हैं |
मीन राशि के रेवती नक्षत्र के अंतिम चरण (26’40-30’00) का ग्रह वर्गोत्तम होता हैं |
यहाँ ध्यान दे की नक्षत्र राशि मे गए ग्रह के अंशो के अनुसार लिए गए हैं | मेष व तुला राशि मे 0’0 से 2’00 अंश तक गया कोई भी ग्रह 10 मे से 10 वर्गो मे वर्गोत्तम हो जाएगा |
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